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समस्याओं से जूझतीं बिहार की महिला खिलाड़ी

– देवानंद दिवाकर

women player problemइसमें कोई शक नहीं कि भारत प्रतिभाओं का देश है, लेकिन यहां न तो इसकी सही पहचान है और न हीं कद्र. यही कारण है कि खेल में प्रतिभाओं की भरमार के बावजूद हमारे देश के पास अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मेडल की कमी रह जाती है. खेल के क्षेत्र में भारतीय प्रतिभाओं की इसी सागर से आपकी मुलाकात कराने वाला है, नारी उत्कर्ष का यह लेख, जहां संसाधनो के अभाव, सामाजिक परेशानियों, सरकार का निम्मतम सहयोग और कुशल प्रशिक्षक के अभाव के बावजूद कुछ लड़कियां राज्य स्तर पर खेल रही है, तो कुछ राष्ट्रीय स्तर और कुछ अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा ले चुकी है. हालांकि अभी भी इनकी स्थिति और पहचान कमोबेश वैसी हीं है, जैसी तीन साल पहले थी…

बिहार का एक जिला है, सिवान जो अपराध, माओवाद और आपसी संघर्ष के कारण चर्चा में होता है. सिवान से करीब 20-25 किलोमीटर की दूरी पर एक प्रखंड है, मैरवां जहां एक कैंपस के अंतर तीन विद्यालय हैं यानी आदर्श प्राथमिक विद्यालय, आदर्श मध्य विद्यालय और हरिराम उच्च विद्यालय. इस विद्यालय के पास के छोटे से खेल का मैदान या कहें बस मैदान में कुछ लड़कियां फुटबॉल, हैंडबॉल, बॉल बैडमिंटन खेलते नजर आई. कुछ लड़कियां दौड़ने का अभ्यास भी कर रही थी. इस छोटे से कस्बानुमा बाजार के छोटे से खेल मैदान में अगर इतनी लड़कियां एक साथ खेलते नजर आए तो आश्चर्य होता है और अनायास हीं आपका ध्यान इस ओर खींच जाता है, क्योंकि गांव में और वह भी बिहार के गांव में जब कुछ लड़कियां इस तरह मैदान में खेलती नजर आए, तो यह अपने आश्चर्य से कम नहीं है. हालांकि खेलते देखने पर तो आश्चर्य मात्र हुआ, लेकिन जब इनके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त हुई, तब पैरों तले की जमीन खींसक गई, मानो कुछ असंभव को संभव होते देख रहे हैं…

बिहार के इस छोटे से कस्बानुमा प्रखंड से कई लड़कियां राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी हैं. सुविधाओं के अभाव के बावजूद इन लोगों के अंदर कुछ कर दिखाने की ललक है और इस ललक को साकार भी किया है. मैरवां और उसके आस पास के गांवों में रहने वाली लड़कियों ने फुटबॉल, हैंडबॉल, बॉल बैडमिंटन, थ्रोबॉल तथा दौड़ में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है. अर्चना कुमारी और तारा खातुन विद्यालय स्तरीय विश्व कप फुटबॉल खेलने फ्रांस जा चुकी हैं. बहुत कम समय में इन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है. 2009 से खेल की शुरूआआत करने वाली इन दोनो लड़कियों का चयन 2010 में बिहार फुटबॉल टीम में हुआ. आल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन ने 2010 में राष्ट्रीय अंडर-16 फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन उत्तराखंड के हल्द्वानी में किया था. इस प्रतियोगिता में यहां की दो लड़कियां तारा खातुन और पुतुल कुमारी को बिहार टीम की ओर से खेलने का मौका मिला. इसके बाद पुतुल कुमारी का चयन भारतीय टीम में किया गया और उसने गुजरात जाकर दो महीने का प्रशिक्षण भी लिया, लेकिन समय पर पासपोर्ट नहीं बनने के कारण पुतुल अंतराष्ट्रीय मैच खेलने के लिए जार्डन नहीं जा सकी. वर्ष 2011 में रानी लक्ष्मीबाई क्लब की चार खिलाड़ी धर्मशीला कुमारी, पुतुल कुमारी, अमृता कुमारी और तारा खातुन का चयन बिहार फुटबॉल टीम के लिए किया गया तथा इन लोगों ने मणिपुर के इंफाल में आयोजित राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया. 2012 में इस क्लब के चार खिलाड़ी पुतुल कुमारी, धर्मशीला कुमारी, अर्चना कुमारी तथा तारा खातुन का चयन बिहार की विद्यालय स्तरीय टीम में हुआ और ये चारो पूणे, महाराष्ट्र में आयोजित राष्ट्रीय विद्यालयी प्रतियोगिता में बिहार की टीम से खेलने गई. इसके बाद तारा खातुन और अर्चना कुमारी का चयन राष्ट्रीय टीम के लिए हुआ और दोनो को फ्रांस के बोरोडेक्स में आयोजित “विद्यालीय विश्व कप” खेलने का मौका मिला. यहां की अमृता कुमारी भी विश्व स्तरीय फुटबॉल खिलाड़ी है. 2013 में इसका चयन भारतीय टीम(अंडर-14) में किया जा चुका है. एशियन फुटबॉल फेडरेशन द्वारा कोलंबो, श्रीलंका में आयोजित प्रतियोगिता में अमृता कुमारी भारतीय टीम में शामिल हुई तथा अच्छा प्रदर्शन किया.

फुटबॉल की तरह हैंडबॉल में भी यहां की खिलाड़ियों ने अपना परचम फहराया है. हैंडबॉल की टीम बनने के कुछ महीनो के अंदर हीं यहां के तीन हैंडबॉल खिलाड़ियों विक्की कुमारी, राधा कुमारी और रानी जायसवाल का चयन बिहार की अंडर-19 हैंडबॉल टीम के लिए किया गया.  वर्ष 2011 में अंडर-19 राष्ट्रीय जुनियर प्रतियोगिता का आयोजन गोवा में किया गया, जिसमें इन तीनो खिलाड़ियों ने बिहार की ओर से खेला. इसी वर्ष इस्ट जोन हैंडबॉल प्रतियोगिता के लिए भी यहां की अन्नपूर्णा कुमारी, रिंकु कुमारी, शकुंतला कुमारी और अमृता मौर्य का चयन बिहार टीम में हुआ और इन लोंगों को कुच बिहार, प. बंगाल में बिहार टीम की ओर से खेलने का मौका मिला. राष्ट्रीय मिनी हैंडबॉल प्रतियोगिता में भी यहां की मधु कुमारी, आरती कुमारी और शोभा कुमारी का चयन बिहार टीम के लिए किया गया.

इन दोनो खेलों के अलावा थ्रो बॉल और एथलेटिक्स में भी यहां की खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया है. बिहार की थ्रो बॉल टीम में भी यहां की खिलाड़ियों का चयन किया गया है. रिंकु कुमारी, धर्मशीला कुमारी, विक्की कुमारी, ममता कुमारी और प्रियंका कुमारी का चयन बिहार की थ्रोबॉल टीम के लिए किया गया. वर्ष 2013 में थ्रोबॉल फेडरेशन आफ इंडिया द्वारा हरियाणा के पानीपत में राष्ट्रीय सीनियर थ्रोबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. इसमें बिहार की टीम ने भी हिस्सा लिया और बिहार की दस सदस्यीय में टीम पांच खिलाड़ी(रिंकु, विक्की,धर्मशीला, ममता और प्रियंका) मैरवां की लक्ष्मी बाई क्लब की थी. बिहार की टीम के अच्छे प्रदर्शन ने राष्ट्रीय चनयकर्ताओं का ध्यान इनकी ओर खींचा और मैरवां की लक्ष्मी बाई क्लब की पांच में से तीन लड़कियों (धर्मशीला कुमारी, रिंकु कुमारी और विक्की कुमारी) का चयन राष्ट्रीय टीम के लिए किया गया. इन लोगों ने मई 2013 में क्वालालंपुर, मलेशिया में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय थ्रोबॉल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया तथा पांच टेस्ट मैच खेले, जिसमें भारतीय टीम बिजेता हुई थी.

मैरवां की कुछ लड़कियों ने एथलेटिक्स में भी अपनी अच्छी पहचान बनाई है. यहां की उषा कुमारी, अंतिमा कुमारी, पुतुल कुमारी और सलमा खातुन ने राज्य स्तरीय अंतर्जिला प्रतियोगिता में दौड़ में हिस्सा लिया. कोलकाता में आयोजित पूर्वी क्षेत्र अंतर्राज्यीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उषा कुमारी ने 400 मीटर दौड़ में रजत पदक तथा सलमा खातुन ने 1000 मीटर की दौड़ में कांस्य पदक जीता था. हरिद्वार, झारखंड में आयोजित राष्ट्रीय जिला स्तरीय एथलेटिक्स में उषा कुमारी ने 400 मीटर की दौड़ में रजत पदक जीता. अंतिमा कुमारी यहां की सबसे अच्छी एथलीट है. इनके प्रशिक्षक संजय पाठक का कहना है कि अपने उम्र की श्रेणी में बिहार की सबसे अच्छी एथलीट है. अंतिमा कुमारी ने कई पदक अपनी झोली में डाला है. वर्ष 2013 में रांची, झारखंड में आयोजित ईस्ट जोन एथलेटिक्स में यहां की अंतिमा कुमारी ने 600 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक जीता था. वर्ष 2013 में बंगलुरू, कर्नाटक में आयोजित राष्ट्रीय जुनियर प्रतियोगिता में अंतिमा ने 100 मीटर दौड़ में कांस्य पादक जीता तथा रांची, झारखंड में आयोजित विद्यालय स्तरीय राष्ट्रीय प्रतियोगित में 200 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक तथा 100 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता. अप्रैल 2014 में हरिद्वार, उत्तांचल, में आयोजित राष्ट्रीय जिला एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 100 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता.

कुछ इसी तरह की उपलब्धि बॉल बैडमिंटन में भी है. आदर्श विद्यालय मैरवां में ही पढ़ने वाली श्वेता कुमारी बॉल बैडमिंटन की खिलाड़ी है. श्वेता अभी तक राष्ट्रीय स्तर की 13 प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी है तथा कुछ मेडल भी जीते हैं. आंध्र प्रदेश में हुई प्रतियोगिता में उसे बेस्ट अपकमिंग प्लेयर का अवार्ड भी मिल चुका है और उसका चयन राष्ट्रीय टीम के लिए भी किया गया है. उसे  अपने देश का प्रतिनिधित्व करना है.बॉल बैडमिंटन में श्वेता के अलावा यहां की विकी कुमारी, शकुंतला कुमारी, अन्नपूर्णा कुमारी, प्रेमशीला और जयश्री ने भी बिहार के लिए जुनियर और सब-जुनियर स्तर पर खेला है. इन लोगों का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा है.

मैरवां के रानी लक्ष्मी बाई स्पोर्ट्स क्लब की लड़कियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कुछ लड़कियां एक से अधिक खेलों में हिस्सा लेती हैं और केवल खेलती ही नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक से अधिक खेलों में भाग ले चुकी हैं. धर्मशीला कुमारी फुटबॉल, हैंडबॉल और थ्रोबॉल खेलती है. राष्ट्रीय स्तर की फुटबॉल खिलाड़ी धर्मशीला का चयन थ्रो बॉल में भारतीय टीम के लिए किया जा चुका है. इसी तरह पुतुल कुमारी और तारा खातुन अंतर्राष्ट्रीय स्तर की फुटबॉल खिलाड़ी है, लेकिन दौड़ की प्रतियोगिताओं में भी यह भाग ले चुकी हैं और कुछ मेडल भी जीत चुकी हैं. मैरवां की इन खिलड़ियों में प्रतिभा की कमी नहीं है, जरूरत है तो केवल इन्हें सही दिशा, सही प्रशिक्षण और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने की.

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