Home > आपबीती > जब अपनी ही बुआ के लड़के ने बनाया शिकार

जब अपनी ही बुआ के लड़के ने बनाया शिकार

sexual harassment by a relative

अक्सर लोग अपने रिश्तेदारों को अपना शुभचिंतक समझते हैं, उनके ऊपर शक नहीं करते और न ही उनकी गतिविधियों पर ध्यान देते हैं. यहां तक कि अगर उन्हें अपने इन रिश्तेदारों की गतिविधियां संदिग्ध जान भी पड़ती है, तो उसे उपेक्षित कर देते हैं क्योंकि उन्हें विश्वास होता है कि यह तो उनका चाचा,ताऊ, मामा या रिश्ते का भाई है. लेकिन, यहां एक लड़की ने अपने साथ हुए उस दुर्व्यवहार के बारे में बता रही है, जिसमें शोषण करने वाला कोई गैर नहीं बल्कि अपनी बुआ का लड़का था.

उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर जिले की रहने वाली सविता (काल्पनिक नाम) आज बीबीए फाइनल ईयर की पढ़ाई कर रही है. पढ़ने में काफी तेजतर्रार यह लड़की बचपन से ही एक अजीब कुंठा मन में लिए हुए थी. फोन पर इसने नारी उत्कर्ष से अपने मन की बात बताना चाहा तो, तुरंत नारी उत्कर्ष की संवाददाता उसके पास पहुंच गई. तब सविता ने ‘नारी उत्कर्ष को बताया कि जब वह बहुत छोटी थी करीब 7-8 वर्ष की तो उसके साथ कुछ गलत हुआ था. जब नारी उत्कर्ष की संवाददाता ने सविता को विश्वास में लिया तो, उसने अपनी दास्तां कुछ इस तरह सुनाई

‘गर्मी की छुट्टियों में बुआ हमारे घर रहने आईं थी. उनके साथ उनका बेटा सार्थक (काल्पनिक नाम) भी आया था. मैं काफी छोटी थी और हमेशा की तरह उस बार भी मुझे बुआ के आने की काफी खुशी थी, क्योंकि लंबे वक्त से बुआ और सार्थक भईया के आने का इंतजार जो था. छोटी बहन की तरह सार्थक भईया मुझे काफी प्यार करता था.

मेरे मम्मी-पापा को तो पूरा यकीन था कि उसके साथ रहने या खेलने-कूदने में मुझे कोई खतरा नहीं है. मैं भी उसे काफी मानती थी और बड़े भाई की तरह सम्मान दिया करती थी. सब ठीक-ठाक चल रहा था. लेकिन, अचानक मैंने उसका व्यवहार बदलता हुआ देखा. जब मैं उसके साथ अकेले में होती तो वह मेरे साथ अजीबोगरीब हरकत किया करता.

मम्मी-पापा से बात करने में हिचक थी

उस वक्त मैं बहुत छोटी थी सो कुछ समझ नहीं पाती थी. मम्मी-पापा से बात कर सकूं इतनी समझ मेरे अंदर थी नहीं. उधर मम्मी-पापा का तो पूरा विश्वास जीत चुका था वह शख्स! वो लोग सपने में भी उसके बारे में कुछ नकारात्मक नहीं सोच सकते थे. एक दिन लाईट नहीं आ रही थी, गर्मियों के दिन थे इसलिए सब छत पर बैठे लाईट का इंतजार कर रहे थे.

मैं और मेरा भाई (अपना सगा भाई) सार्थक भईया के साथ खेल रहे थे कि अचानक लाईट आ गई. सभी लोग नीचे जाने लगे. मेरा अभी खेलने का और मन कर रहा था. मौका देख सार्थक ने कह दिया कि सविता मेरे पास ही सो जाएगी आप सभी सो जाओ मैं इसके साथ खेल रहा हूं. यह सुनते ही मैंने तुरंत खेलने से मना कर दिया. सभी लोग कहने लगे कोई बात नहीं तुम लोग खेलो, सविता तो वैसे भी सार्थक की लाडली है इसके साथ तो तू खेलेगा ही.

थोड़ी देर खेलने के बाद मैं भी सो गई मेरे ही साथ वह भी सो गया. लेकिन उस रात उसने बेशर्मी की जैसे पराकाष्ठा ही पार कर दी. देर रात वह मेरे साथ गंदी हरकतें करने लगा. मेरा मन हुआ कि चीखकर सभी को जगा दूं क्योंकि, शायद मेरे साथ कुछ गलत हो रहा है. लेकिन फिर डर गई कि कहीं मेरी ही पिटाई न हो जाए.

जैसे-तैसे रात बीती. अगले दिन फिर वह सभी घरवालों के सामने मुझ से सामान्य व्यवहार करने लगा. हालांकि, मैं कुछ शांत थी और रात का वाकया समझने की कोशिश कर रही थी कि वह क्या था. इसी उधेड़बुन में दूसरी रात भी आ गई और वह फिर से मुझे अपने पास सुलाने की बात करने लगा. हालांकि इस बार मैंने मम्मी से यह कहकर मना कर दिया कि आज मुझे आपके पास सोना है, रात मुझे आपकी याद आई थी. यह सुनकर मम्मी ने अपने पास मुझे सुला लिया और मैं वहां जाने से बच गई.

गर्मियों की छुट्टियां खत्म हो चुकी थीं और बुआ को वापिस अपने घर जाना था सो चली गईं. इस बार उनके जाने से मैंने राहत की सांस ली और अपने घर में काफी दिन बाद सुरक्षित महसूस किया. थोड़े ही दिन बाद सार्थक भईया की शादी थी. पापा-मम्मी ने कहा हमें भी वहां जाना है. यह बात सुनते ही मैं घबरा गई. मैंने मना किया तो पापा ने कहा कि अगर तू नहीं जाएगी तो तेरे भाई को खराब लगेगा क्योंकि तुझे तो बहुत मानता है. उसका असली चेहरा किसी के सामने नहीं था इसलिए सभी को उसके ऊपर पूरा यकीन था, लेकिन मेरे मन की दशा तो मुझे ही पता थी.

दबाव से गई शादी में

खैर शादी में हम सभी गए. मेरे छोटे चाचा के बच्चे भी गए थे. मेरी एक चचेरी बहन मेरे जितनी ही बड़ी थी. हम सभी बुआ के यहां खेलकूद रहे थे. शाम होते-होते रात हो गई. सभी ने खाना-पीना खाया. अब बारी आई सोने की. इस बार भी बुआ का लड़का कहने लगा कि काफी भीड़ हो रही है सविता परेशान हो जाएगी इसलिए मेरे साथ आराम से सो जाएगी.

मेरी इच्छा न होते हुए भी सभी के दबाव में मुझे जाना पड़ा. हालांकि, इस बार मैंने अपनी बचपने की बुद्धि के हिसाब से खुद को बचाने का पूरा इंतजाम कर लिया था और अपने नेकर की बैल्ट काफी कसकर बांध ली. रात को वही हुआ जिसकी उम्मीद थी. पहले की तरह इस बार भी उसने मेरे साथ घिनौनी हरकत शुरू कर दीं. बैल्ट टाइट होने के कारण उसे हरकतें करना मुश्किल लग रहा था तो उसने मेरा हाथ पकड़कर गंदी हरकतें शुरू कर दीं.

अगले दिन शादी का कार्यक्रम निपट गया और मैं अपने मम्मी-पापा के साथ घर आ गई थी. तभी से मेरे मन में कुंठा है कि मेरे साथ यह क्या हुआ था. बड़ी होकर मुझे समझ आया कि मेरे साथ काफी गलत हुआ था. इस बात को मैं सभी से कहना चाहती हूं. अपने मां-बाप को बताना चाहती हूं कि जिस इंसान को वह इतना गलत समझते हैं उसने उनकी बेटी का शोषण किया है. मैं खुद उससे भी बात करना चाहती हूं, क्योंकि बचपन की यह कुंठा मुझे चैन से रहने नहीं दे रही.

चचेरी बहन भी बनी पीड़िता 

दूसरी बात उस शख्स ने सिर्फ मेरे साथ ही ऐसा नहीं किया था बल्कि मेरी चचेरी बहन के साथ भी यही हरकत करता था. वह अक्सर छोटी बच्चियों को अपनी हवस का शिकार बनाता था. अपनी दुविधा को जब सविता ने नारी उत्कर्ष को बताया तो नारी उत्कर्ष की टीम ने उसकी काउंसलिंग की. नारी उत्कर्ष संवाददाता ने सविता को सलाह दी कि कोई उचित मौका देखकर वह उस लड़के से बात करे और उसकी गलती का एहसास कराए साथ ही अपने मम्मी-पापा को भी बताए.

खैर वह सही मौका भी जल्दी ही आ गया. पिछले महीने ही सविता के घर एक पारिवारिक समारोह आयोजित हुआ था. जिसमें सभी रिश्तेदारों के साथ सार्थक भी आया था. समारोह के बाद जब सभी जाने लगे तो, सार्थक विदाई के रूपये देने के लिए सविता को ढूंढने लगा. सविता की मम्मी ने कहा सविता ऊपर है, जाकर मिल लो. जैसे ही वह सविता के कमरे में घुसा और सौ का नोट आगे बढ़ाया सविता को समझ आ गया कि इससे अच्छा मौका नहीं हो सकता.

उसने सौ रुपये वापिस करते हुए कहा कि पहले इधर बैठो. थोड़ी सी ना-नुकूर के बाद वह कुर्सी पर बैठ गया. सविता ने कहा कि आपने मेरे साथ बचपन में क्या किया था आपको याद है कुछ? अब कुछ सकपकाया हुआ वह शख्स खिसिआहट में मुस्कुराने लगा और बोला कि वो तो बहुत पुरानी बात है. सविता ने कहा कि मुस्कुराना बंद करो मैं काफी गुस्से में हूं पहले ये बताओ कि मरे साथ ऐसा क्यों किया? इस पर वह शख्स कहने लगा कि अब क्या मेरी जेल कराएगी?  इस बार सविता ने तेज आवाज में कहा मैं उस वक्त बच्ची थी आप तो समझदार थे.

पहले यह बताओ आपने जो किया वह गलत था या सही? अब वह शख्स बुरी तरह से घबरा गया था और तुरंत उसने स्वीकार किया कि मैंने गलत किया था. इसके अलावा भी सविता ने उसे नसीहतें दीं थी कि मेरे अलावा भी आप कईयों को शिकार बना चुकें है इस घिनौनी हरकत को बंद करें, मुझे तो लगता है कि आपने अपनी बेटी को भी नहीं बख्शा होगा. अगर जरा भी पछतावा है तो इन हरकतों को बंद करें. यह सुनकर वह शख्स शर्म से पानी-पानी हो चुका था.

उसका शर्मिंदा चेहरा देख सविता को काफी संतुष्टि मिल रही थी. कुछ ही देर बाद सविता ने नारी उत्कर्ष को फोन कर धन्यवाद देते हुए कहा कि उसने अपने मन में बर्षों से दबी कुंठा को निकाल दिया है और अब काफी बेहतर महसूस कर रही है.

(अगर आपके मन में भी है कोई ऐसी बात है जो आपको परेशान कर रही है तो तुरंत नारी उत्कर्ष को लिख भेजिए. हम हर संभव आपकी मदद करने की कोशिश करेंगे.)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *