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वंदना लूथरा: महिलाअों के लिए बनीं प्रेरणा

कहते हैं कि पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। उसी तरह काम करने की भी कोई उम्र या समय नहीं होते। अगर आप कुछ ठान लें और उसके लिए लगातार प्रयास करें तो सफल होने की संभावनाएं तब भी उतनी ही बनी रहती हैं। इस बात को प्रमाणित करती हैं वीएलसीसी हेल्थ केयर लिमिटेड की संस्थापक वंदना लूथरा, जिन्होंने अपने सफलता की कहानी नारी उत्कर्ष के साथ साझा की.

वंदना लूथरा, ब्यूटी और फिटनेस के क्षेत्र में जानामाना नाम। उनकी कंपनी वीएलसीसी ने आज लोगों के बीच साख बनाकर भारत में अपनी विशेष पहचान बनाई है। इतना ही नहीं कंपनी के विश्वभर में कई सेंटर सफलतापूर्वक चल रहे हैं। सही दिशा, लगन और चाह से व्यक्ति कहां नहीं पहुंच सकता, वंदना लूथरा इसको प्रमाणित करती हैं। वह महिलाओं में छुपी असीम क्षमताओं का उदाहरण हैं और रूढ़ियों को तोड़कर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।

वंदना ने दिल्ली के सफदरजंग में एक ब्यूटी पार्लर से अपने व्यावसाय की शुरूआत की थी और आज उनकी कंपनी 16 देशों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी है। उनकी कंपनी कई ब्यूटी प्राॅडक्ट्स का उत्पादन भी करती है। इतना ही नहीं, उन्हें औद्योगिक क्षेत्र में अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए ’पद्म श्री’ से भी नवाजा गया है।

वंदना लूथरा को अपने काम में परिवार से सहयोग मिला था लेकिन विरासत में कोई उद्योग नहीं। लिहाजा, उन्होंने खुद अपने व्यवसाय की नीव डाली और न केवल व्यवसाय फलता-फूलता रहा बल्कि उसकी जड़ें भी गहरी पकड़ बनाती गईं। उन्होंने फिटनेस के व्यवसाय में कदम रखने से पहले इस क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करके बारीकियों को भी जाना था। वंदना लूथरा ने ग्रेजुएशन के बाद जर्मनी में न्यूट्रीशन एवं काॅस्मेटोलाॅजी में उच्च शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद लंदन, म्युनिख और पेरिस में ब्यूटी केयर, फिटनेस, फूड एण्ड न्यूट्रीशन और स्किन केयर में कई स्पेशलाइज्ड कोर्स और माॅड्यूल किए।

उन्होंने अपना बिजनस शादी और मां बनने के बाद शुरू किया, जब कोई औरत परिवार में सबसे अधिक व्यस्त होती है। उन्हें अपने पति का पूरा सहयोग मिला और अपनी बचत की छोटी सी रकम से वर्ष 1989 में दिल्ली में वीएलसीसी की शुरूआत की। तब यह भारत का पहला ‘ट्रांस्फाॅर्मेशन सेंटर’ था। उन दिनों देश का वेलनेस मार्केट पहचान ही बना रहा था और फिटनेस व ब्यूटी मिलाकर संपूर्ण वेलनेस एक नए तरह का क्षेत्र था। जब वंदना लूथरा ने अपने बिजनस में कदम रखा तो उन दिनों गिनी-चुनी महिलाएं ही उद्यमी के तौर पर दिखाई पड़ती थीं। खास कर गैर-व्यावसायिक परिवारों की महिलाएं तो बहुत कम थीं। उनके सामने शुरूआती चुनौती आई अपनी पहचान बनाने और लोगों का भरोसा जीतने की।

लोग ब्यूटी पार्लर से तो वाकिफ थे पर ट्रांस्फाॅर्मेशन सेंटर का आइडिया उनके लिए बिल्कुल नया था। इतना ही नहीं लोगों में एक महिला की बिजनेस क्षमताओं को लेकर आशंका भी रहती थी। इसलिए उन्हें अपने उद्यम के लिए पैसा जुटाना में भी मुश्किल आई। वंदना कहती हैं, ’इन सब कठिनाईयों को पार करने का एक ही तरीका था कि मैं पूरी मेहनत और लगन से काम करूं ताकि लोगों को यह अहसास हो जाए कि मेरे बिजनेस में जान है। जल्द ही, मेरी मेहनत रंग लाई। मुझे सब्र का फल मिला और उसके बाद मैंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।’

वंदना लूथरा बताती है कि उन्हें परिवार से हमेशा खुद निर्णय लेने और आत्मनिर्भर होने का प्रोत्साहन मिला है। उन्हें वेलनेस के क्षेत्र में काम करने का विचार भी अपने पिता के साथ एक ट्रिप पर आया। वह एक बार अपने पिताजी के साथ जर्मनी में उनके दोस्तों से मिली जो पति-पत्नी थे और उनका अपने देश में हेल्थ सेंटर चलता था। उनकी जोड़ी कमाल की थी। उनमें एक न्यूट्रिशनिस्ट थे और दूसरे काॅस्मेटोलाॅजिस्ट। ब्यूटी और वेलनेस के बिजनेस में कदम रखने के वंदना के निर्णय पर उनका बहुत प्रभाव था।

25 साल के काम-काज में वीएलसीसी लगातार तरक्की करते हुए न केवल एशिया की सबसे बड़ी वेलनेस कम्पनियों में शुमार हो गई है बल्कि इसने भारत में वेलनेस सेक्टर के विस्तार में भी सराहनीय योगदान दिया है। वंदना लूथरा के निरंतर प्रयासों से कंपनी के सेंटर 16 देशों के 121 शहरों में 300 से अधिक स्थानों पर मौजूद है। भारत, श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, मलेशिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ओमान, बहरीन, कतर, कुवैत, सऊदी अरब और कीनिया में खुद कम्पनी अपना काम-काज करती है। साथ ही भारत और सिंगापुर स्थित इसके प्लांट में वीएलसीसी की बड़ी रेंज़ के स्किन केयर, हेयर केयर और बाॅडी-केयर प्रोडक्ट का उत्पादन भी होता है। कम्पनी में पूरी दुनिया के 39 देशों के 6,000 से अधिक लोग काम करते हैं। इनमें अधिकांश डाॅक्टर, न्यूट्रीशनिस्ट, साइकोलाॅजिस्ट, काॅस्मेटोलाॅजिस्ट, ब्यूटीशियन, फीजियोथिरेपिस्ट आदि हैं।

एक सफल महिला उद्यमी के अपने अनुभव के आधार पर वंदना कहती हैं कि एक सफल उद्यमी बनने के लिए असीम साहस, कुछ करने की उमंग, आत्मविश्वास, दूरदर्शिता, प्रबंधन का कौशल और चुनौती स्वीकार करने (जोखिम उठाने) की क्षमता होनी चाहिए। साथ ही एक उद्यमी बन जाना ही काफी नहीं है, एक अच्छा नेता होना भी जरूरी है। ऐसा नेता जो साथ काम करने वालों और संगठन का ख्याल रख सके। उनका मानना है कि एक महिला में ये सभी गुण हैं और वह जो ठान ले कर सकती है। महिलाएं कमर कस कर अपने बिजनेस में जी-जान से जुट जाएं। सपनों को अधूरा मत छोड़ें। आप अपने उद्यम में जितना पैर फैलाएंगे आपकी सफलता उतनी ऊंची होगी।

‘आज मेरी भी एक शख्सियत है’
एक सामान्य महिला से आज जानीमानी महिला उद्यमी बनने के बाद वंदना लूथरा अपने जीवन में आए अंतर के बारे में बताती हैं, ’वीएलसीसी को इस मुकाम पर पहंुचाने में लगे इन 25 सालों में मेरी एक शख्सियत बनी है। आज मैं बेहतर निर्णय लेती हूं। परिस्थितियों को अच्छी तरह समझती हूं। साथ ही मैं आज भी अपने पति के लिए वही पत्नी हूं। बच्चों की वही मां हूं और जानने वाले सभी के लिए वही इंसान हूं। मैं खुद को किस्मतवाली मानती हूं कि मुझे मेरे माता-पिता और मेरे पति, मुकेश ने दिल खोल कर सहयोग दिया।’

बाहर काम करने से बढ़ता है आत्मविश्वास
बाहर काम करने से जीवन में क्या बदलवा आते हैं इस पर वंदना कहती हैं कि महिला जैसे ही काम-काजी हो जाती है, जिन्दगी का उसका नजरिया ही बदल जाता है। वह एक नए आत्मविश्वास से भर जाती हैं। खुद पर भरोसा बढ़ जाता है। स्त्री शक्ति का अहसास होता है और अपनी दिनचर्या पर हमारा वश चलता हैं। इससे न केवल परिवार की आमदनी बढ़ती है बल्कि परिवार में आर्थिक सहयोग देने का संतोष भी होता है। हालांकि, एक महिला के लिए काम और स्वास्थ्य के बीच सही संतुलन पर ध्यान देना भी महत्वपूर्ण है। अपनी सेहत का ख्याल रखना भी जरूरी है।

महिला सशक्तिकरण के लिए सबसे जरूरी है उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता। पैरों पर खड़ा होने की ताकत से ही ठोस निर्णय लेने की ताकत मिलती है। आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर महिला को खुद के सक्षम होने का अहसास रहता है और अपनी काबिलियत पर भरोसा भी।

महिला उद्यमियों को वित्तीय सहायता देनी होगी
भारत में आज भी महिला उद्यमी बहुत कम हैं। इसके लिए वंदना लूथरा सबसे बड़ा कारण महिलाओं की क्षमताओं पर लोगों का भरोसा न होना मानती हैं। वह कहती हैं कि महिला के उद्यमी बनने के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा आज भी पैसा जुटाना है। वित्तीय संस्थान, यहां तक कि बैंक भी उद्यम शुरू करने के लिए महिलाओं को कर्ज देने से कतराते हैं, खासकर यदि महिला व्यावसायिक घराने की न हो या बिल्कुल नए क्षेत्र में कदम रखना चाहती हो। वैसे तो जमाना बहुत बदला है। खासकर शहरों में महिलाओं के काम पर जाने की पाबंदी दूर हुई है। पर जहां तक एक महिला के खुद के काम करने की बात हो दूसरे दर्जे के नगरों और शहरों में आज भी लोगों की मानसिकता नहीं बदली है।

देश तरक्की करे इसके लिए जरूरी है कि महिलाएं शिक्षा और प्रशिक्षण पा कर सशक्त हो जाएं। देश की आबादी का लगभग 49 प्रतिशत महिलाओं का है जिन्हें पुरुषों के समान तरक्की करने के अवसर और विकल्प मिलने चाहिए ताकि वे खुद अपनी तकदीर बना सकें। काॅर्पोरेट जगत में भी महिलाओं के प्रति भेदभाव है जबकि हमें जरूरत है कि कम्पनी के निदेशक मंडल में महिलाओं की भागीदारी बढ़े। वंदना का कहना है, ’मुझे लगता है ‘केवल महिला बैंक’ का गठन होना चाहिए। जिनकी नीतियां पहली पीढ़ी की उन महिला उद्यमियों के हिसाब से हों जिनका किसी व्यावसायिक घराने से संबंध नहीं है ताकि अधिक-से-अधिक महिलाओं को व्यवसाय करने का हौसला मिले।’

वीएलसीसी ने दिया महिलाओं को नौकरी में बढ़ावा
वीएलसीसी अपने स्तर से महिला सशक्तिकरण के लिए योगदान भी देती है। कंपनी का ’एंटरप्रेन्याॅरशिप फाॅर वुमन प्रोग्राम’ महिलाओं में उद्यम व प्रतिभा को बढ़ावा देता है और उन्हें पुरस्कृत भी करता है। आज देश में कंपनी के 10 में से सात विभागों की प्रमुख महिलाएं ही हैं। 13 देशों में 300 से अधिक सभी रिटेल आउटलेट की लीड मैनेजर खासकर महिलाएं ही हैं। वीएलसीसी का प्रत्येक वेलनेस सर्विस सेंटर और वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट लाभ कमाने वाला, अपने-आप में एक स्वतंत्र केंद्र है जो एक उद्यमी (मोटे तौर पर एक महिला), सेंटर मैनेजर की देखरेख में काम करता है। इससे उन महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता और खुद पर भरोसे का रास्ता खुल जाता है।

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